कांग्रेस के फायरब्रैंड नेता कन्हैया कुमार रांची आए तो थे छात्रों की ‘गूंज’ सुनने और उसे ‘हूंकार’ भरने, लेकिन खुद झारखंड के छात्रों के दर्द पर ऐसा ‘मौन व्रत’ धारण कर गए कि लोग देखते रह गए. कांग्रेस के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ में शामिल होने पहुंचे कन्हैया ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तो जमकर भड़ास निकाली. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में छात्रों का भविष्य चोरी हो रहा है, नौकरियों का कोई ठिकाना नहीं है और पेपर लीक माफियाओं से सरकार के कनेक्शन की जांच होनी चाहिए. लेकिन, जैसे ही बात घूम-फिर कर खुद झारखंड में हुए पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने पर आई, कन्हैया बाबू बगलें झांकने लगे.
‘बाहर’ शेर, ‘घर’ में ढेर?
कन्हैया कुमार ने रांची की धरती से बड़ी-बड़ी बातें कीं. उन्होंने कहा कि देश में एक ‘जॉब कैलेंडर’ होना चाहिए ताकि छात्र मानसिक तनाव में न जिएं. उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी की अगुवाई में छात्रों के दर्द को नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचाया जा रहा है. सब कुछ ठीक था, लेकिन जब पत्रकारों ने कन्हैया को आईना दिखाते हुए झारखंड के हालिया पेपर लीक मामलों पर घेरना चाहा, तो उनका सुर बदल गया. वो गोल-मोल बातें करने लगे कि “चाहे राजस्थान हो, तेलंगाना हो या कर्नाटक, अगर हमारी सरकार के अंदर भी कुछ होगा तो हम सड़क पर उतरेंगे.”
कन्हैया कुमार ने मंच से कहा कि इस देश में चौबीस घंटे में कई छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है. बेशक यह चिंताजनक है, लेकिन कन्हैया जी को यह समझना होगा कि छात्र सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में ही परेशान नहीं हैं, बल्कि झारखंड के युवाओं का भी वही हाल है.
झारखंड में पिछले कुछ साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए उम्मीदों और निराशा के बीच झूलते रहने वाले रहे हैं. साल 2019 से लेकर 2026 तक का सफर पेपर लीक, कड़े कानूनों, अदालती फैसलों और परीक्षाओं के बनने-बिगड़ने की एक लंबी दास्तान है.
साल 2019 : प्रशासनिक नाकामियों ने युवाओं को दिया था झटका
साल 2019 की शुरुआत ही छात्रों के लिए एक बड़े झटके के साथ हुई. इस साल कोई पेपर लीक तो नहीं हुआ, लेकिन प्रशासनिक कमियों और नियोजन नीति के कानूनी फेरों ने युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया. सबसे बड़ा झटका JPSC अभ्यर्थियों को लगा, जहां तकनीकी खामियों के चलते वर्ष 2017, 2018 और 2019 की कंबाइंड सिविल सेवा परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया था. 7वीं, 8वीं और 9वीं सिविल सेवा परीक्षाओं का विज्ञापन वापस ले लिया गया, जिससे छात्रों की तीन साल की मेहनत बेकार हो गई और बाद में सरकार को उम्र सीमा में छूट देने के लिए नियम बदलने पड़े.
वहीं, JSSC CGL परीक्षा जो 2015 से खिंच रही थी, उसे रघुवर दास सरकार की 100% स्थानीय आरक्षण नीति के कानूनी पेचों और विधानसभा चुनावों के कारण टाल दिया गया. हालांकि, छात्रों के भारी विरोध के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और ग्रेस मार्क्स देकर उन्हें प्रमोट किया गया. कुल मिलाकर, सरकारी नीतियों की इस अदूरदर्शिता का सीधा खामियाजा राज्य के युवाओं को भुगतना पड़ा.
साल 2020 : कोरोना महामारी के चलते लगा ब्रेक
साल 2020 में परीक्षाओं के रद्द होने की वजह कोई पेपर लीक नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी (COVID-19) और देशव्यापी लॉकडाउन था. स्कूल-कॉलेज बंद हो गए और 10वीं-12वीं की परीक्षाओं को छोड़कर बाकी उच्च शिक्षा की परीक्षाओं में छात्रों को इंटरनल असेसमेंट के आधार पर प्रमोट करना पड़ा.
इसी साल राज्य की राजनीति बदली तो नियुक्तियों के नियम भी बदले. हेमंत सोरेन की नई सरकार ने कार्यभार संभालते ही पिछली रघुवर दास सरकार के समय की जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) और कई तकनीकी परीक्षाओं के विज्ञापनों को यह कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया कि इनकी नियोजन नीति और स्थानीय भाषा के नियमों में विसंगतियां हैं. रही-सही कसर दिसंबर में झारखंड हाईकोर्ट के एक फैसले ने पूरी कर दी, जिसमें 2016 की नियोजन नीति को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया गया. इसके कारण चल रही शिक्षक नियुक्तियां अटक गईं और सरकार को नई नीति बनाने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन करना पड़ा. उधर, छठी जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा को लेकर भी ओएमआर शीट और क्वालिफाइंग मार्क्स में गड़बड़ी के आरोपों के बाद मामला कोर्ट पहुंच गया.
साल 2021 : विज्ञापन का साल, पर परीक्षाओं का बुरा हाल
साल 2021 मुख्य रूप से बड़े-बड़े विज्ञापनों का साल रहा, जिसमें JSSC JE (जूनियर इंजीनियर) और JSSC CGL (सचिवालय) जैसी बड़ी भर्तियां निकाली गईं. लेकिन विडंबना देखिए कि इन विज्ञापनों की किस्मत इतनी खराब थी कि ये परीक्षाएं सालों-साल टलती रहीं और जब इनका नंबर आया, तो ये पेपर लीक के दलदल में फंस गईं.
2021 के विज्ञापन वाली जूनियर इंजीनियर (JE) की परीक्षा जब जुलाई 2022 में आयोजित हुई, तो रांची और जमशेदपुर के केंद्रों से पेपर लीक की खबरें आ गईं. जेएसएससी ने 25 जुलाई को परीक्षा रद्द कर दी और पुलिस ने इस मामले के तार उड़ीसा से जोड़ते हुए मुख्य आरोपी रंजीत मंडल को क्योंझर से दबोचा. इसी तरह CGL 2021 की परीक्षा तो और भी लंबी खिंची और जनवरी 2024 में जाकर हो सकी, जहां पहले ही दिन पेपर-3 (सामान्य ज्ञान) टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर लीक हो गया था.
साल 2022 : हाईकोर्ट का बड़ा झटका, एक साथ 12 परीक्षाएं रद्द
साल 2022 का आधा समय तो जूनियर इंजीनियर परीक्षा के पेपर लीक के हंगामे, धरने-प्रदर्शनों और फिर अक्टूबर-नवंबर में उसकी दोबारा परीक्षा कराने में निकल गया. लेकिन साल के अंत में, यानी 16 दिसंबर 2022 को परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई.
हाईकोर्ट ने ‘रमेश हांसदा बनाम झारखंड राज्य’ केस में सरकार की 2021 की उस नियोजन नीति को खारिज कर दिया, जिसके तहत सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए झारखंड से ही 10वीं और 12वीं पास होना जरूरी किया गया था. इस एक फैसले के आते ही कार्मिक विभाग के आदेश पर जेएसएससी ने एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 12 बड़ी भर्ती परीक्षाओं (CGL, उत्पाद सिपाही, लैब असिस्टेंट, PGT शिक्षक आदि) के विज्ञापनों को पूरी तरह निरस्त कर दिया. इससे करीब 11 हजार पदों पर होने वाली बहालियां एक झटके में लटक गईं. बाद में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय नई नियोजन नीति (60-40 फॉर्मूला) के तहत 2023 में इन परीक्षाओं के नए सिरे से विज्ञापन जारी किए.
| क्र.सं. | रद्द किए गए विज्ञापन / परीक्षा का नाम (2021-2022) |
| 1 | झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC CGL 2021) |
| 2 | झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा (Excise Constable 2022) |
| 3 | झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2021 (नियोजन नीति के तहत दोबारा रद्द) |
| 4 | झारखंड तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय परीक्षा 2022 |
| 5 | झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग प्रतियोगिता परीक्षा 2022 |
| 6 | झारखंड इंटरमीडिएट स्तर (कंप्यूटर/टंकण) संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2022 |
| 7 | झारखंड सचिवालय आशुलिपिक सेवा संवर्ग प्रतियोगिता परीक्षा 2022 |
| 8 | झारखंड प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant) प्रतियोगिता परीक्षा 2022 |
| 9 | झारखंड स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (PGT) प्रतियोगिता परीक्षा 2022 |
| 10 | झारखंड मैट्रिक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2022 |
| 11 | झारखंड औद्योगिक प्रशिक्षण अधिकारी (ITI Instructor) परीक्षा 2022 |
| 12 | झारखंड डिप्लोमा स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2022 (176 पद) |
साल 2023 : सबसे चर्चित रहा ‘JSSC CGL 2023’ परीक्षा
साल 2023 भी नियोजन नीति के विवादों और पुरानी परीक्षाओं को री-शेड्यूल करने की जद्दोजहद में बीता. इस दौरान की सबसे चर्चित परीक्षा ‘JSSC CGL 2023’ रही, जिसकी परीक्षा टलते-टलते जनवरी 2024 में आयोजित हुई, लेकिन पहली ही पाली के बाद परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक हो गया. छात्रों के भारी आक्रोश और चौतरफा दबाव के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इसके अलावा, साल 2023 की शुरुआत में राज्य की नियोजन नीति (Planning Policy) के कानूनी अड़चनों में फंसने के कारण भी कई पूर्व विज्ञापनों को रद्द कर नए सिरे से जारी करना पड़ा, जिससे युवाओं को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा.
पेपर लीक और नकल माफियाओं के बढ़ते हौसलों से चौतरफा घिरी सरकार ने इस साल एक बहुत बड़ा नीतिगत कदम उठाया. अगस्त 2023 में विधानसभा से “झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण के उपाय) विधेयक, 2023” पास कराया गया. इस कानून के तहत पेपर लीक करने वाले गिरोह या एजेंसियों के लिए 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का नियम बना. साथ ही, दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का भी प्रावधान किया गया. वहीं, नकल करने वाले छात्रों के लिए भी 3 साल की जेल और परीक्षाओं से डिबार (प्रतिबंध) करने की व्यवस्था की गई.
साल 2024 : CGL परीक्षा पर बवाल और NEET का ‘झारखंड कनेक्शन’
साल 2024 परीक्षाओं के लिहाज से सबसे ज्यादा उथल-पुथल वाला रहा. 28 जनवरी 2024 को जब बहुप्रतीक्षित JSSC CGL की परीक्षा शुरू हुई, तो पेपर-3 परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप पर बिक चुका था. छात्रों के भारी गुस्से और उग्र आंदोलन के बाद जेएसएससी को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी. मामला इतना बढ़ा कि आयोग के अध्यक्ष नीरज सिन्हा को इस्तीफा देना पड़ा और सरकार ने जांच के लिए एसआईटी (SIT) बना दी. एसआईटी ने विधानसभा के एक अंडर सेक्रेटरी के बेटों सहित कई दलालों को गिरफ्तार किया. यह परीक्षा जब सितंबर 2024 में दोबारा हुई, तो फिर धांधली के आरोप लगे और आखिरकार दिसंबर 2024 में हाईकोर्ट ने इसके रिजल्ट पर रोक लगा दी. उधर, 17 मार्च को हुई 11वीं-13वीं JPSC पीटी परीक्षा में भी चतरा और जामताड़ा में पेपर लीक के आरोप लगे, हालांकि प्रशासन ने इसे निराधार बताया.
इसी साल देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा NEET-UG का पेपर लीक हुआ और कमाल की बात देखिए कि पूरे देश को हिला देने वाले इस घोटाले का हॉटस्पॉट झारखंड का हजारीबाग शहर निकला, जहां के ‘ओएसिस स्कूल’ से पेपर लीक हुआ था. चूंकि मामला राष्ट्रीय था, इसलिए सीबीआई ने कमान संभाली और स्कूल के प्रिंसिपल अहसान उल हक समेत कई आरोपियों को जेल भेजा.
साल 2025 : फिर लीक हुए मैट्रिक के पेपर, JTET पर लगी रोक
साल 2025 में भी पेपर लीक का साया राज्य से नहीं हटा. फरवरी 2025 में एक बार फिर 2019 वाला इतिहास दोहराया गया. झारखंड अकादमिक काउंसिल (JAC) की 10वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान हिंदी और विज्ञान के पेपर लीक होकर सोशल मीडिया पर आ गए. कोडरमा के मरकच्चू और अन्य केंद्रों से जब मिलान किया गया तो प्रश्न हूबहू मैच कर गए. इसके बाद तत्कालीन मुख्य सचिव अलका तिवारी ने आपातकालीन बैठक बुलाई और जेएसी ने दोनों परीक्षाओं को पूरे राज्य में रद्द कर दिया.
इसी साल जून में होने वाली ‘झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2025’ को भी परीक्षा शुरू होने से पहले ही रोक दिया गया. शिक्षा विभाग को पता चला कि इसके सिलेबस और परीक्षा नियमावली में कुछ गंभीर तकनीकी कमियां हैं, जिससे आगे चलकर कानूनी विवाद हो सकता है. लिहाजा, करीब साढ़े तीन लाख छात्रों का भविष्य ध्यान में रखते हुए विज्ञापन वापस लिया गया ताकि नियमों में सुधार कर नया नोटिफकेशन जारी किया जा सके.
साल 2026 : ‘फर्जी पेपर लीक’ का खेल और 18 साल का इंतजार फिर अधूरा
करंट ईयर 2026 की बात करें, तो इस साल भी परीक्षा व्यवस्था विवादों से अछूती नहीं रही. अप्रैल 2026 में JSSC उत्पाद सिपाही परीक्षा के दौरान अचानक खबर उड़ी कि पेपर लीक हो गया है और तमाड़ के राड़गांव में पुलिस ने छापेमारी कर मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह और विकास कुमार समेत 169 लोगों को गिरफ्तार किया. लेकिन जब पुलिस ने जांच के बाद 2,400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, तो एक अनोखा खुलासा हुआ. असल में कोई पेपर लीक हुआ ही नहीं था. इस शातिर गैंग ने पिछले 10 सालों के पुराने सवालों को मिलाकर एक ‘फर्जी सेट’ तैयार किया था और पेपर लीक की अफवाह फैलाकर युवाओं से लाखों रुपये ठग लिए थे.
इसी साल अप्रैल में, पूरे 18 साल के लंबे इंतजार के बाद JPSC ने प्रोफेसर भर्ती और पीएचडी एडमिशन के लिए ‘झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET)’ आयोजित किया. लेकिन बदइंतजामी ऐसी रही कि बोकारो के एक केंद्र पर एजुकेशन सब्जेक्ट के 32 पेपर पहुंचे ही नहीं, वे पेपर गलती से धनबाद भेज दिए गए थे और रांची में धुंधले प्रश्नपत्र बांट दिए गए, जिसके बाद आयोग को इन सेंटरों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी. वहीं दूसरी ओर, क्षेत्रीय भाषाओं (भोजपुरी, मगही, अंगिका) को शामिल करने के विवाद और कैबिनेट की मंजूरी से पहले ही नोटिफिकेशन जारी हो जाने के कारण, झारखंड अकादमिक काउंसिल को ‘JTET 2026’ की पूरी अधिसूचना ही रद्द करनी पड़ी. इसके अलावा, मई में हुई देशव्यापी NEET-UG 2026 परीक्षा के तार भी रांची रिम्स की एक छात्रा और रिमोट एक्सेस नकल गिरोह से जुड़े, जिसकी जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है.
Also Read : तह तक : अमित शाह के दौरे पर पुलिसकर्मियों की जान लेने वाले रविंद्र गंझू के बारे में पूरी जानकारी

