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    जोहार ब्रेकिंग

    जेएमएम बनाम बीजेपीः चार दिनों का प्यार ओ रब्बा, मिलने की उम्मीद, लेकिन फिर से लंबी जुदाई

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJuly 5, 2026Updated:July 5, 2026No Comments6 Mins Read
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    विजय उरांव 

    वैसे तो हेमंत 2.0 सरकार के बनने के कुछ दिन बाद से ही बाजार में ये चर्चा शुरू हो गई थी कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मिलने जा रहे हैं. रह – रह कर इस बात को बल मिलता रहा, जब कांग्रेस और जेएमएम के मंत्रियों, नेताओं के एक ही मुद्दे पर विरोधाभासी बयान दिखने लगे. चाहे वह जेटेट में भाषा के मुद्दे पर रार हो, चाहे बोर्ड-परिषद में हिस्सेदारी का मसला हो. या फिर बिहार चुनाव के दौरान जेएमएम को इंडिया गठबंधन की तरफ ठेंगा दिखाए जाने का प्रकरण.

    सियासी गलियारों में एक डील की चर्चा चली. कि अगर हेमंत सोरेन बीजेपी से हाथ मिलाते हैं तो इसकी शर्तें क्या होगी. तथाकथित तौर पर जांच एजेंसियों के दस्तक से मुक्ति, शिबू सोरेन को भारत रत्न, केंद्र में महत्वपूर्ण मंत्रालय, अन्य राज्यों में आदिवासी बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने की छूट. बदले में हेमंत सोरेन को राज्य की राजनीति किसी और हाथ सौंपनी होगी और उन्हें केंद्र में जाना होगा. बात यहीं फंसी और यह डील कई चरणों की गुप्त मुलाकातों के बाद भी अपने अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच पाई.

    इन सब के दौरान दोनों दलों के बीच एक अघोषित समझौता सा था, कि दोनों एक दूसरे पर राजनीतिक हमलों की तीव्रता कम रखेंगे. जिससे विरोधी-सहोयोगी दोनों का आभास होता रहे. साथ में दोनों ही कांग्रेस पर राजनीतिक हमला करते रहेंगे. यही हुआ भी, जेएमएम ने तो अपने गठबंधन के साथियों को गद्दार तक कारर दे दिया.

    एक बार फिर यह दृश्य राज्यसभा चुनाव के दौरान देखने को मिला. चुनाव की घोषणा यानी 1 जून से होने से 18 जून को अंतिम परिणाम आने तक में दोनों दल एक दूसरे के प्रति फिर सॉफ्ट हुए. परिणाम भी मनमुताबिक मिले. बीजेपी समर्थित परिमल नाथवाणी इंडिया गठबंधन के विधायकों से परोक्ष और अपरोक्ष दोनों तौर पर वोट लेने में सफल रहे.

    वक्त और जज्बात बदलने की कहानी

     

    लेकिन एक बार फिर वक्त बदले और जज्बात भी बदले. दोनों दल एक दूसरे पर पुराने प्रतिद्वंदी की तरह हमलावर हो गए हैं. बीते 3 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने एक्स हैंडल पर एक तस्वीर पोस्ट किया. जिसमंह आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल, अरवा राजकमल और सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक राजीव लोचन बक्शी, सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात करते दिख रहे हैं. इस पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा, “संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात.” जिस पूजा सिंघल के मामले को कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया, आज वही सत्ता के मंच पर दिखाई दें, तो सवाल उठना लाज़िमी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल और राजीव बक्शी की मौजूदगी क्या संदेश देती है? क्या यही है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, या फिर अब नारा बदल चुका है? लगता है ‘स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन’ में सबसे बड़ा स्टेक झारखंड की नैतिकता ही है. जनता तस्वीरें भी देखती है और संदेश भी समझती है.’’ लेकिन एक बार फिर वक्त बदले और जज्बात भी बदले. दोनों दल एक दूसरे पर पुराने प्रतिद्वंदी की तरह हमलावर हो गए हैं. बीते 3 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने एक्स हैंडल पर एक तस्वीर पोस्ट किया. जिसमंह आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल, अरवा राजकमल और सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक राजीव लोचन बक्शी, सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात करते दिख रहे हैं. इस पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा, “संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात.” जिस पूजा सिंघल के मामले को कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया, आज वही सत्ता के मंच पर दिखाई दें, तो सवाल उठना लाज़िमी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल और राजीव बक्शी की मौजूदगी क्या संदेश देती है? क्या यही है भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, या फिर अब नारा बदल चुका है? लगता है ‘स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन’ में सबसे बड़ा स्टेक झारखंड की नैतिकता ही है. जनता तस्वीरें भी देखती है और संदेश भी समझती है.’’

    बता दें, पूजा सिंघल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. जिसमें ईडी की कार्रवाई के बाद उन्हें 28 महीने तक जेल में रहना पड़ा था. हालांकि इस वक्त वो सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद सेवा में लौट चुकी हैं. वहीं राजीव लोचन बक्शी पर बाबूलाल कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं. हालांकि इन आरोपों पर न तो कोई जांच हुई है, न ही किसी तरह की दोष सिद्धि.

    अब जवाबी हमले की बारी जेएमएम की थी. जेएमएम ने भी अपने एक्स हैंडल पर तीन तस्वीरों पोस्ट की. एक फोटो में बाबूलाल पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को पार्टी का पट्टा पहना रहे हैं, दूसरे में व्यवसाई विष्णु अग्रवाल के साथ हैं और तीसरे में अपने सलाहकार सुनील तिवारी के साथ हैं. जेएमएम लिखती है, ‘’इतनी जल्दी नहीं बाबूलाल जी, इतनी जल्दी नहीं. संगत की बात चली है, तो एक सवाल हमारा भी. क्या कहीं किसी की मौजूदगी से न्यायालय का फैसला बदल जाता है क्या? अगर नहीं…, तो फिर यही कसौटी सब पर बराबर लागू होनी चाहिए. वैसे भी, जो लोग आज “संगत” का पाठ पढ़ा रहे हैं, वे पहले अपने राजनीतिक आंगन की तस्वीरें भी देख लें. तस्वीरों की राजनीति आसान है, तथ्यों की राजनीति थोड़ी मुश्किल. वैसे क़ुतुबमीनार की लम्बाई कितनी है?’’

    इन तस्वीरों में मधु कोड़ा पर भी खनन, कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले के आरोप हैं. मामला अब भी कोर्ट में हैं, लेकिन इस बीच कोड़ा दंपत्ति बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. व्यवसाई विष्णु अग्रवाल पर भी मनी लॉंड्रिंग के आरोप हैं, ईडी की जांच के बाद जेल जाना पड़ा. मामला अब भी अदालत में है. सुनील तिवारी पर सैक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगे थे.

    इससे पहले बीते 2 जुलाई को बाबूलाल ने जमशेदपुर में करनी सेना के नेता हिमांशू की हत्या के बाद कहा, ‘’जमशेदपुर में पुलिस गाड़ी से खींचकर युवक की हत्या किए जाने के मामले में एसपी/एसएसपी को सस्पेंड कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी दिखावे की कारवाई कर रहे हैं. यदि मुख्यमंत्री वास्तव में हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए गंभीर हैं तो उन पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कराएं, जिनकी मौजूदगी में हत्या हुई है. जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक एएसआई के सामने डीजीपी तक नतमस्तक हैं. पुलिस अधिकारियों के तबादले से लेकर अवैध वसूली तक के कार्य उनके इशारे पर ही हो रहे हैं. जब तक यह परंपरा चलती रहेगी, तब तक प्रदेश की कानून व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो सकती.’’

    बतौर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल अपने हिस्से का काम कर रहे हैं. बतौर सीएम हेमंत सोरेन अपना काम कर रहे हैं. इन दोनों के बीच सवाल अब भी वही है, बीजेपी की सत्ता में भागीदारी लेने की बेचैनी को कब तक शांति मिल पाती है. राजनीतिक तौर पर हेमंत सोरेन फिलहाल बीजेपी से कई फर्लांग आगे दिखाई दे रहे हैं. तथाकथित तौर पर संभावित राजनीतिक परिवर्तन जब भी होंगे, शर्तें उनके मुताबिक ही होंगी.

    Also Read : क्या अयोध्या के बाद अब बद्रीनाथ धाम में भी हो रही चढ़ावा चोरी?

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