मुस्कान चौधरी
पहले कोयला निकला, देश को ऊर्जा मिली. धनबाद देश की कोल राजधानी कहलाई. खदान बंद होने के बाद अवैध खनन से मरनेवालों की लंबी ऋंखला है. शायद ही कोई महीना होगा, जब धनबाद सहित राज्य के अन्य बंद कोयला खदान में अवैध खनन के दौरान खदान धंसने से किसी मजदूर के मौत की खबर न मिलती हो. लेकिन सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड यानी सीसीएल ने अब इस दाग को मिटाने की कोशिश शुरू की है. बंद खदान में भरे पानी से आम जन का प्यास बुझाने की योजना शुरू होने जा रही है.
मतलब, कोयला खदानों से निकलने वाला पानी अब बेकार नहीं जाएगा. जल्द ही यही पानी शुद्ध होकर लोगों की प्यास बुझाएगा. कोल इंडिया की महत्वाकांक्षी ‘कोल नीर’ परियोजना के तहत खदानों के पानी को साफ कर बोतलबंद पेयजल के रूप में बाजार में उतारा जाएगा. केंद्रीय कोयला मंत्री अगले तीन-चार दिनों में इस परियोजना का उद्घाटन कर सकते हैं.
कोल इंडिया की इस पहल के तहत बीसीसीएल, सीसीएल, एसईसीएल और एमसीएल में माइन वाटर बॉटलिंग प्लांट तैयार किए गए हैं. झारखंड में 30 जून को परियोजना के उद्घाटन की संभावना है. इस योजना का उद्देश्य खदानों से निकलने वाले पानी का बेहतर उपयोग करना और लोगों को सस्ती दर पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है.
बीसीसीएल की 46 खदानों से लगभग 1280 लाख घनमीटर पानी निकलता है. अब इस पानी को आधुनिक तकनीक से शुद्ध कर बोतलों में भरकर बाजार में बेचा जाएगा. ‘कोल नीर’ के तहत 20 लीटर पानी की कीमत मात्र 5 रुपये रखी गई है, जिससे आम लोगों को कम कीमत पर पेयजल उपलब्ध हो सकेगा.
खदानों का पानी सीधे पीने योग्य नहीं होता, क्योंकि इसमें मिट्टी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, बैक्टीरिया और अन्य अशुद्धियां मौजूद रहती हैं. इसलिए पानी को फिल्ट्रेशन और रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) तकनीक से कई चरणों में साफ किया जाएगा. इसके बाद भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानकों के अनुसार गुणवत्ता जांच की जाएगी और फिर पानी की बॉटलिंग कर बाजार में भेजा जाएगा.
कोल इंडिया और बीसीसीएल के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना पानी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. इससे खदानों से निकलने वाले पानी का सदुपयोग होगा, स्थानीय समुदायों को लाभ मिलेगा और लोगों को सस्ता व शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा. भविष्य में इस योजना का और विस्तार करने की भी तैयारी है.
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