Ranchi : रांची के बुढ़मू प्रखंड के बाड़े गांव में देशभक्ति और भारतीय सेना के सम्मान का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। भारतीय सेना के जेसीओ (जूनियर कमीशंड अधिकारी) सत्येंद्रनाथ सिंह के सेवानिवृत्त होकर अपने पैतृक गांव लौटने पर ग्रामीणों ने उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया। इस मौके पर गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में सड़क किनारे खड़े होकर अपने गांव के इस वीर सपूत का स्वागत करने पहुंचे। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ फूल-मालाएं पहनाकर और पारंपरिक रीति-रिवाजों से उनका अभिनंदन किया। पूरे गांव में गर्व और सम्मान की भावना साफ झलक रही थी।
30 वर्षों तक देश सेवा का गौरवशाली सफर
बाड़े गांव निवासी स्वर्गीय मनबहाल सिंह के सबसे छोटे पुत्र सत्येंद्रनाथ सिंह ने भारतीय सेना में लगभग 30 वर्षों तक अनुशासन, निष्ठा और समर्पण के साथ देश की सेवा की। उन्होंने बताया कि सेवा काल के दौरान वे कई अहम सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे और कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा में डटे रहे। सत्येंद्रनाथ सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध, वर्ष 2017 के डोकलाम विवाद, गलवान घाटी से जुड़े संवेदनशील अभियानों सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में भी योगदान दिया।
देश के दुर्गम इलाकों में निभाई जिम्मेदारी
सत्येंद्रनाथ सिंह ने कहा कि सेना की नौकरी केवल नौकरी नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। उन्होंने पंजाब, लेह-लद्दाख, जैसलमेर, नागालैंड समेत देश के कई ऐसे क्षेत्रों में तैनाती की जहां मौसम और परिस्थितियां बेहद कठिन होती हैं। इन दुर्गम इलाकों में रहते हुए उन्होंने लगातार देश की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। ग्रामीणों ने बताया कि सत्येंद्रनाथ सिंह ने जिस तरह देश सेवा की, वह गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा है।
युवाओं को सेना में जाने की दी प्रेरणा
गांव में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान सत्येंद्रनाथ सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए उन्हें भारतीय सेना और अन्य सशस्त्र बलों में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश सेवा का अवसर हर किसी को नहीं मिलता और जो भी युवा मेहनत करेगा, वह सेना में जाकर देश का नाम रोशन कर सकता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे गांव के युवाओं को भर्ती की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देंगे और बुनियादी प्रशिक्षण में भी सहयोग करेंगे ताकि वे बेहतर तरीके से सेना में चयनित हो सकें।
ग्रामीणों के सम्मान ने पेश की मिसाल
बाड़े गांव में हुए इस स्वागत समारोह को लेकर लोगों में खास उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि देश की रक्षा में वर्षों तक योगदान देने वाले सैनिक जब सेवानिवृत्त होकर लौटते हैं तो कई बार उनका जीवन गुमनामी में चला जाता है, लेकिन बाड़े गांव के लोगों ने यह साबित कर दिया कि सैनिकों का सम्मान केवल मंचों पर नहीं बल्कि गांव और समाज के स्तर पर भी होना चाहिए। ग्रामीणों का कहना था कि यह कार्यक्रम सिर्फ सत्येंद्रनाथ सिंह का सम्मान नहीं बल्कि पूरे भारतीय सेना और देश की रक्षा में लगे हर जवान के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है।
समारोह बना ग्रामीण एकता का प्रतीक
इस आयोजन में न केवल गांव के लोग बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों से प्रबुद्ध लोग भी शामिल हुए। समारोह में ग्रामीण एकता और देशभक्ति की भावना देखने को मिली। लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से समाज में देशभक्ति का संदेश जाता है और नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।
गांव के लिए गौरव का पल
बाड़े गांव के लोगों के लिए यह क्षण गर्व का था कि उनके गांव का बेटा 30 वर्षों तक सेना में सेवा कर देश की रक्षा करता रहा। गांववासियों ने कहा कि सत्येंद्रनाथ सिंह जैसे सैनिकों की वजह से देश के नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने सत्येंद्रनाथ सिंह के उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ जीवन की कामना की। गांव में देर तक उत्साह और देशभक्ति का माहौल बना रहा।
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