Garhwa : गढ़वा जिले में बिना मानकों के चल रहे निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने अब सख्ती शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने शहर के कई निजी अस्पतालों में छापेमारी की। जांच के दौरान कई जगह गंभीर लापरवाहियां सामने आईं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की असल स्थिति उजागर हो गई। छापेमारी के दौरान कई अस्पतालों में डॉक्टर मौजूद ही नहीं मिले। कहीं मरीज भर्ती थे, लेकिन उनका इलाज करने वाला कोई चिकित्सक नहीं था। इस स्थिति को देखकर सिविल सर्जन ने नाराजगी जताई और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
चंद्रिका अस्पताल में मिली सबसे बड़ी लापरवाही
सिविल सर्जन सबसे पहले कचहरी के पास स्थित चंद्रिका हॉस्पिटल (झारखंड हॉस्पिटल) पहुंचे। वहां न तो कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई मरीज भर्ती था। अस्पताल की हालत पूरी तरह से अव्यवस्थित पाई गई, जिससे इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। इसके बाद सहारा हॉस्पिटल का निरीक्षण किया गया, जहां एक महिला मरीज भर्ती मिली जो रक्तस्राव की समस्या से जूझ रही थी। लेकिन इलाज के लिए वहां भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नर्स ने जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन जांच में दावा गलत पाया गया।
जीएन और ऋषु राज हॉस्पिटल में भी खामियां उजागर
जीएन हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद भर्ती महिला मरीज मिली, लेकिन डॉक्टर वहां नहीं थे। वहीं ऋषु राज हॉस्पिटल में पांच मरीज भर्ती मिले, लेकिन इलाज के लिए कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सिविल सर्जन ने अस्पताल बंद करने और मरीजों को सदर अस्पताल भेजने का आदेश दिया।
मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन ने साफ कहा कि जिले में बिना मानक और बिना डॉक्टर के चल रहे अस्पताल किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने सभी निजी अस्पताल संचालकों को चेतावनी दी कि अगर नियमों का पालन नहीं हुआ तो अस्पताल सील कर दिए जाएंगे। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ सरकारी डॉक्टरों के नाम निजी अस्पतालों में सर्जरी से जुड़े मामलों में पाए गए हैं। इस पर सिविल सर्जन ने संबंधित डॉक्टरों को शो-कॉज नोटिस जारी करने की बात कही है।
Also Read : कोडरमा के सतगावां में हाथियों का आतंक, एक व्यक्ति घायल


