Johar Live Desk: असम में बेदखली अभियान को लेकर विवाद बढ़ गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद (ए) के प्रमुख अरशद मदनी ने दावा किया कि उन्होंने कभी सोनिया गांधी को पत्र लिखकर हिमंता बिस्वा सरमा को कांग्रेस से टिकट न देने की अपील की थी। मदनी ने कहा कि सरमा की सोच “आरएसएस मानसिकता” वाली थी और आज वही असम में तनाव फैला रहे हैं।
इस दावे पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहले राहुल गांधी ने धमकी दी थी और अब मदनी चेतावनी दे रहे हैं। सरमा ने दो टूक कहा कि जितनी धमकियां मिलेंगी, असम की जनता उतनी ही मजबूती से खड़ी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बेदखली अभियान जारी रहेगा और मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने भी मदनी पर निशाना साधा और कांग्रेस से सवाल किया कि क्या मौलाना अब उनके टिकट तय करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभ्यतागत बहस में गलत पक्ष पर खड़ी है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने 2001 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी और तीन बार जलुकबाड़ी से विधायक बने। तरुण गोगोई सरकार में उन्होंने वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य अहम विभाग संभाले। 2014 में मतभेद के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। 2016 में वे भाजपा से विधायक बने और 2021 में असम के मुख्यमंत्री बने।
हाल के दिनों में सरमा कई बार जमीयत नेताओं पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने कहा कि अरशद मदनी हों या महमूद मदनी, उन्हें उनकी कोई परवाह नहीं। वहीं महमूद मदनी गुट ने असम की बेदखली कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि अब तक 50,000 से अधिक परिवार, जिनमें बड़ी संख्या बंगाली भाषी मुस्लिमों की है, बेघर हो चुके हैं।
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