Ranchi : रांची के चर्चित सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन मृतक छात्र के पिता मनबहाल महतो इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की है। इसी पिटीशन पर शुक्रवार को रांची सिविल कोर्ट स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर उठाए सवाल
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान मामले में आंशिक बहस हुई। मृतक विनय महतो के पिता की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारुका ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर कई सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि मामले की जांच अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। हालांकि, समयाभाव के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी और कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ा दिया। आंशिक सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले सप्ताह की तारीख तय की है। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें विस्तार से रखेंगे। इसके बाद ही अदालत यह तय करेगी कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की जाए या फिर मामले में आगे कोई और कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला चार फरवरी 2016 की रात का है। रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल परिसर में बने शिक्षक-शिक्षिकाओं के हॉस्टल में आठवीं कक्षा के छात्र विनय महतो की निर्मम हत्या कर दी गई थी। अगले दिन यानी पांच फरवरी को उसका शव बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े हुए थे।
इन लोगों को बनाया गया था आरोपी
मामले की शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल की शिक्षिका नाजिया, उनके पति मोहम्मद आरिफ और उनके दोनों बच्चों को आरोपी बनाया था। इसके बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। बाद में जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई, जिसने अपनी जांच पूरी करने के बाद कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई शुरू होने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर सीबीआई की विशेष अदालत के अगले फैसले पर है। अदालत अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह तय करेगी कि क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दी जाए या मामले में आगे की जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
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