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    Home»धर्म/ज्योतिष»इस बार किस दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति, 14 या 15 जानें…
    धर्म/ज्योतिष

    इस बार किस दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति, 14 या 15 जानें…

    Team JoharBy Team JoharJanuary 10, 2025No Comments3 Mins Read
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    मकर
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    Johar Live Desk : हिंदू धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है. देश के अन्य जगहों पर इस पर्व को उत्तरायण, पोंगल, माघ बिहु और खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. हर साल की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ हैं, 14 जनवरी को यह या फिर 15 जनवरी को है. आपको बता दें इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा. जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर यानी प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. वहीं, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास का महीना भी खत्म हो जाएगा.

    इस पर्व के दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, और इस दिन दान करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है. आगे आपको बताएगे की इस पर्व को लेकर मुख्य परंपराएं और मान्यताएं क्या हैं.

    तिल और गुड़ का सेवन

    मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ खाने की परंपरा है, जो शरीर को गर्मी देने के साथ-साथ स्वस्थ रखने के लिए लाभकारी माने जाते हैं. यह संकेत भी है कि हमें जीवन में मीठे रिश्ते और प्रेम बढ़ाना चाहिए. तिल और गुड़ का दान भी कड़वाहट को मिठास में बदलने का प्रतीक माना जाता है.

    पतंगबाजी

    मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भगवान राम से जुड़ी हुई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक में चली गई थी. तब से यह परंपरा हर साल मकर संक्रांति पर जीवित रहती है, और लोग इस दिन पतंगबाजी का आनंद लेते हैं.

    दान और पूजा

    इस दिन विशेष रूप से दान करने की परंपरा है. लोग पुराने कपड़े, अनाज, तिल, गुड़ और अन्य सामाग्री को गरीबों में दान करते हैं. माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान शुभ फल देता है और पुण्य की प्राप्ति होती है.

    गंगा स्नान

    मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है. इस दिन स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और आत्मशुद्धि होती है. कई लोग इस दिन विशेष पूजा भी करते हैं, जो आत्मिक शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है.

    मकर संक्रांति का पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे उत्तरायण, पोंगल, माघ बिहू और खिचड़ी. यह दिन कृषि से जुड़ी खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक भी है. इस दिन के पर्व और परंपराएं भारतीय संस्कृति की समृद्धता को दर्शाती हैं.

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