Pawan, Ranchi
देश की संसद का उच्च सदन यानी राज्यसभा अक्सर लोकसभा की तुलना में कम चर्चा में रहता है. लेकिन ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और माय नेता की जून 2026 की रिपोर्ट ने राज्यसभा की ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जो आम लोगों को चौंका सकती है. रिपोर्ट बताती है कि राज्यसभा में बैठने वाले कई सांसद करोड़पति ही नहीं, अरबपति हैं. कई सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं महिलाओं की संख्या अब भी बेहद कम है. रिपोर्ट में राज्यसभा के 226 मौजूदा सांसदों के शपथपत्रों का विस्तार किया गया है. इन दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट यह बताती है कि राज्यसभा में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके पास अकूत संपत्ति है.
हर तीसरे सांसद के खिलाफ केस
रिपोर्ट के मुताबिक 226 सांसदों में से 69 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. या यूं कहें कि राज्यसभा में बैठने वाले हर तीसरे सांसद के खिलाफ कोई न कोई आपराधिक मामला दर्ज है. इनमें से 36 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है. गंभीर मामलों में हत्या की कोशिश, महिलाओं के खिलाफ अपराध, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं से जुड़े मुकदमे शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि केवल छोटे दल ही नहीं बल्कि देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक दल भी इस सवाल से अछूते नहीं हैं. भाजपा के 107 सांसदों में से 28 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. वहीं कांग्रेस के 29 सांसदों में से 12 सांसद ऐसे हैं जिनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं.
धनकुबेरों का दबदबा
अगर राज्यसभा की आर्थिक तस्वीर देखें तो यह और भी चौंकाने वाली है. रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा सांसदों की औसत संपत्ति 115.25 करोड़ रुपये है. इसका मतलब यह हुआ कि एक औसत राज्यसभा सांसद के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है. 226 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति 26,047 करोड़ रुपये से अधिक है। यह रकम कई राज्यों के वार्षिक बजट के बराबर बैठती है. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि राज्यसभा के 100 सांसद ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 10 करोड़ रुपये से अधिक है. यानी लगभग हर दूसरा सांसद करोड़पति श्रेणी में आता है. दूसरी तरफ केवल चार सांसद ऐसे हैं जिनकी घोषित संपत्ति 20 लाख रुपये से कम है. रिपोर्ट का एक और बड़ा खुलासा यह है कि राज्यसभा में 31 सांसद ऐसे हैं जिनकी घोषित संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है. यानी सदन का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा अरबपति सांसदों से बना हुआ है.
कौन हैं सबसे अमीर सांसद?
सबसे अमीर सांसदों की सूची में तेलंगाना से बीआरएस सांसद डॉ. बंदी पार्थ सारथी टॉप पर हैं. उन्होंने अपने शपथपत्र में 5300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है. दूसरे स्थान पर पंजाब से भाजपा सांसद राजिंदर गुप्ता हैं. उनकी घोषित संपत्ति 5053 करोड़ रुपये से अधिक है. तीसरे स्थान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ अभिषेक मनु सिंघवी हैं। उन्होंने 2558 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है. समाजवादी पार्टी की सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन 1578 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर हैं.
झारखंड के परिमल नथवानी पर 256 करोड़ की देनदारी
झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी एक बार फिर अपनी संपत्ति को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने 755 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। इसके साथ ही वे देश के सबसे अमीर सांसदों में शामिल हो गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि उनके ऊपर 256 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां भी दर्ज हैं. रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड से राज्यसभा के छह सांसद हैं. इन सभी सांसदों की कुल घोषित संपत्ति करीब 779 करोड़ रुपये है. जहां एक तरफ हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति वाले सांसद हैं, वहीं कुछ सांसद ऐसे भी हैं जिनकी संपत्ति लाखों रुपये में दर्ज की गई है. पंजाब के संत बलबीर सिंह ने मात्र 3.79 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है. यह पूरी राज्यसभा में सबसे कम संपत्ति है. केरल के एए रहीम ने 11.62 लाख रुपये और मध्य प्रदेश की सुमित्रा बाल्मिक ने 17.85 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है.
राज्यों के हिसाब से देखें तो तेलंगाना के सांसद संपत्ति के मामले में सबसे आगे हैं. तेलंगाना के राज्यसभा सांसदों की कुल घोषित संपत्ति 8310 करोड़ रुपये से अधिक है. इसके बाद पंजाब का स्थान है, जहां के सांसदों की कुल संपत्ति 5729 करोड़ रुपये से अधिक है. उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर है। इन राज्यों में बड़े कारोबारी, उद्योगपति और आर्थिक रूप से मजबूत राजनीतिक नेता बड़ी संख्या में राज्यसभा तक पहुंचे हैं.
शिक्षा के मामले में मजबूत, महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी बेहद कम
रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में सांसद उच्च शिक्षित हैं. 68 सांसद पोस्ट ग्रेजुएट हैं. 53 सांसद ग्रेजुएट हैं. 33 सांसदों के पास डॉक्टरेट की डिग्री है. लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और सोशल साइंस जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में राज्यसभा में मौजूद हैं. वहीं, महिला आरक्षण कानून पास होने के बावजूद संसद में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित दिखाई देती है. राज्यसभा में कुल 34 महिला सांसद हैं, जबकि पुरुष सांसदों की संख्या 192 है. यानी महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 15 प्रतिशत के आसपास है.
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