Garhwa : झारखंड के गढ़वा जिले के चिनिया रोड स्थित आशा किरण अस्पताल में जो चल रहा था, उसने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदर एसडीएम संजय कुमार की छापेमारी में पता चला कि अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर तो चल रहा था, मरीज भी भर्ती थे, लेकिन वहां जिम्मेदार डॉक्टर मौजूद ही नहीं थे।
कागजों पर अस्पताल, हकीकत में बड़ा खेल
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल सिर्फ कागजों पर ठीक तरीके से रजिस्टर्ड दिख रहा था, लेकिन असल में स्थिति बेहद खराब थी। जिस डॉक्टर के नाम पर रजिस्ट्रेशन था, वे पहले से ही सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, यानी अस्पताल में उनकी मौजूदगी संभव ही नहीं थी। छापेमारी में यह भी सामने आया कि बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के ही सर्जरी की जा रही थी। आरोप है कि कुछ पैसों के लालच में मरीजों को ऐसे हालात में ऑपरेशन के लिए रखा गया, जहां उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
कई गंभीर अनियमितताएं उजागर
जांच के दौरान अस्पताल में कई गड़बड़ियां मिलीं-
- लेटर पैड पर ‘बी. कुमार’ और ‘एम. सिंह’ जैसे संदिग्ध नाम पाए गए
- इनकी डिग्रियों और योग्यता का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला
- फरवरी के बाद मरीजों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं रखा गया
- अस्पताल में चल रही दवा दुकान का भी कोई वैध लाइसेंस नहीं था
ऑपरेशन थिएटर भी मिला अव्यवस्थित
ऑपरेशन थिएटर की हालत भी बेहद खराब मिली। वहां न तो साफ-सफाई थी और न ही कोई जिम्मेदार स्टाफ मौजूद था। सर्जरी के बाद भर्ती मरीजों की देखभाल के लिए भी कोई योग्य डॉक्टर नहीं था।
प्रशासन ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
एसडीएम संजय कुमार ने इसे सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि मरीजों की जिंदगी से इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन को निर्देश दिए गए हैं। इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। जहां एक तरफ प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ लोग निजी अस्पतालों की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।


