Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»झारखंड»झारखंड में टुसू पर्व का उत्साह, खेती के महत्व से जुड़ा है त्योहार
    झारखंड

    झारखंड में टुसू पर्व का उत्साह, खेती के महत्व से जुड़ा है त्योहार

    Team JoharBy Team JoharJanuary 14, 2023No Comments3 Mins Read0
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    रांची: देशभर में मकर सक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है, तो झारखंड में इस त्योहार का साथ- साथ मनाया जा रहा है टुसू पर्व। इस पर्व का झारखंड में खास महत्व है, यह सर्दी में फसल काटने के बाद मनाया जाने वाला पर्व है।टूसू का शाब्दिक अर्थ कुंवारी है, इस त्योहार के पीछे मान्यता और कहानी है। पर्व का झारखंड में विशेष महत्व है। पढ़ें इस पर्व का इतिहास इससे जुड़ी मान्यता।

    पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा इस पर्व का सबसे बड़ा आधार

    झारखंड में ज्यादातर पर्व त्योहार प्रकृति से जुड़े हैं। इस पर्व के संबंध में ज्यादा लिखित दस्तावेज मौजूद नहीं है। पीढ़ियों से जो परंपरा और कहानी चली आ रही है वही एक बड़ा आधार है। इस त्योहार के दिन पूरे कूड़मी, आदिवासी समुदाय द्वारा अपने नाच-गानों और मकर संक्रांति पर सुबह नदी में स्नान कर उगते सूरज की प्रार्थना करके टुसू की पूजा की करते हैं। इस त्योहार के माध्यम से साल की नयी शुरुआत और बेहतरी की कामना की जाती है।

    vidh

    इन इलाकों मे धूमधाम से मानाया जाता है त्योहार
    झारखंड के कई इलाकों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर झारखंड के दक्षिण पूर्व इलाको में टुसू पर्व का खास महत्व है। इन इलाकों में मुख्य रूप से रांची, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, रामगढ़, बोकारो, धनबाद जिलों और पंचपरना क्षेत्र शामिल हैं। झारखंड के साथ- साथ पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, मिदनापुर व बांकुड़ा जिलों, ओड़िशा के क्योंझर, मयूरभंज, बारीपदा जिलों में भी इसे धूमधाम से मनाया जाता है।

    क्या है इस पर्व के पीछे की मान्यता और कहानी

    अघन संक्रांति (15 दिसंबर) से लेकर मकर संक्रांति (14 जनवरी) तक इसे कुंवारी कन्याओं के द्वारा इसे मनाया जाता है। इस पर्व की खास कहानी है, टुसू एक गरीब कुरमी किसान की बेटी थी। उसकी सुदंरता की चर्चा दूर- दूर तक थी राजा के दरबार तक भी यह खबर फैली। राजा ने इस कन्या को प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र रचा। राज्य में भीषण अकाल का लाभ लेते हुए राजा ने ऐलान किया कि किसानों को लगान देना ही होगा टुसू ने ही किसान समुदाय का एक संगठन खड़ा किया। राजा के सैनिकों और किसानों के बीच भीषण युद्ध हुआ। टुसू को जब सैनिक गिरफ्तार करके राजा के पास ले जाने के लिए पहुंचे तो उशने जल-समाधि लेकर शहीद हो जाने का फैसला लिया और उफनती नदी में कूद गयी। इस दिन टुसू की इस कुरबानी की याद किया जाता है। टुसू कुंवारी कन्‍या थी, इसलिए इस पर्व में कुंवारी लड़कियों का खास महत्व है।

    इस पर्व को तीन नामों से जाना जाता है
    घर की कुंवारी कन्याएं प्रतिदिन संध्या समय में टुसू की पूजा करती हैं. गांव की कुंवारी कन्याएं टुसू की मूर्ति बनाती हैं। इसकी सजावट की जाती है, फिर धूप, दीप के साथ टुसू की पूजा होती है। टुसू पर्व मुख्य रूपसे तीन नामों से जाना जाता है. पहला टुसु परब, मकर परब और पूस परब। इसके अलावा बांउड़ी और आखाईन जातरा का भी इस पर्व के साथ विशेष महत्व है या यूं कहें कि एक दूसरे से जुड़े हैं, बांऊड़ी के दूसरा दिन या मकर संक्रांति के दूसरे दिन “आखाईन जातरा” मनाया जाता है।

    खेती के महत्व से जुड़ा है त्योहार
    इसका खास महत्व है इस दिन खेती का काम खत्म होता है साथ ही खेती की नयी शुरुआत भी इसी दिन से होती है। बांउड़ी तक प्रायः खलिहान का कार्य समाप्त कर आखाईन जातरा के दिन कृषि कार्य का प्रारंभ मकर संक्रांति के दिन होता है. इस दिन नया घर बनाने के लिए नींव रखना भी बेहद शुभ माना जाता है।

    Jharkhand news
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleरांची से नेतरहाट घूमने गए छात्रों की कार अनियंत्रित हो कर खाई में गिरी , 2 की मौत
    Next Article रांची : चाईबासा में घायल जवान सौरभ को दूसरे दिन भेजा गया दिल्ली, ग्रीन कॉरिडोर बना कर किया गया एयरलिफ्ट

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड: आदिवासी महोत्सव के लिए मोरहाबादी मैदान तैयार, कल से दो दिवसीय आयोजन

    August 8, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    आंदोलन, एजेंडा और इतिहास का सबक: बुद्धदेव के पतन से हेमंत सोरेन क्या सीखें?

    August 8, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    सुदिव्य ने कहा था- BJP से बात नहीं करेंगे, फिर कांग्रेस से क्यों मिले? छात्र आंदोलन में उठे सवाल

    August 8, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    JPSC-JSSC विवाद : NSUI ने सरकार को सौंपा मांग पत्र, 90 दिनों में CID-SIT जांच की मांग

    August 8, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड : राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल पहुंचे इरफान अंसारी, भूख हड़ताल खत्म करने की अपील

    August 8, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड में नेहा बोरा पर स्याही, RSS की साजिशः जनाधिकार महासभा

    August 8, 2026
    Latest Posts

    झारखंड: आदिवासी महोत्सव के लिए मोरहाबादी मैदान तैयार, कल से दो दिवसीय आयोजन

    August 8, 2026

    संसद नहीं X बना बहस का अड्डा, एक्स पर भिड़े राहुल-रिजिजू, महिला आरक्षण पर छिड़ी जंग

    August 8, 2026

    आंदोलन, एजेंडा और इतिहास का सबक: बुद्धदेव के पतन से हेमंत सोरेन क्या सीखें?

    August 8, 2026

    सुदिव्य ने कहा था- BJP से बात नहीं करेंगे, फिर कांग्रेस से क्यों मिले? छात्र आंदोलन में उठे सवाल

    August 8, 2026

    JPSC-JSSC विवाद : NSUI ने सरकार को सौंपा मांग पत्र, 90 दिनों में CID-SIT जांच की मांग

    August 8, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.