किसलय शानू
झारखंड में जेपीएससी परीक्षा घोटाला उत्तर प्रदेश परीक्षा घोटाले की तर्ज पर हुआ था. इस योजना को तैयार टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने तैयार किया था. इस बात का खुलासा सीआईडी ने अब रामवीर सिंह के खिलाफ न्यायालय में दायर चार्जशीट में किया है, जबकि 30 अगस्त को ही जोहार लाइव के द्वारा इस बात का खुलासा किया जा चुका है. जिसमें इस बात का भी उल्लेख था कि इस कार्य में रामबीर के साथ अन्य लोग भी शामिल थे, और घोटाले की योजना सुनियोजित थी.
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार पूर्व में वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में दो महत्वपूर्ण परीक्षाएं क्रमशः ग्राम विकास पदाधिकारी और उत्तर प्रदेश विधानसभा अधीनस्थ सेवा परीक्षा हुई थी. इसी तरह की अपराध शैली अपनाकर कदाचार हुआ था.
संबंधित केस में रामबीर सिंह जेल भी गया था. इस बात की पुष्टि वर्तमान में सीआईडी की जांच में भी हुई है. सीआईडी के अनुसार उत्तर प्रदेश परीक्षा घोटाले को लेकर लखनऊ में 6 अप्रैल 2021 को केस दर्ज हुआ था. केस से से संबंधित रिपोर्ट और चार्जशीट सीआईडी के द्वारा उत्तर प्रदेश आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग से प्राप्त की गई है.
संबंधित केस में आरोप पत्र से स्पष्ट होता है कि इसी अपराध शैली के साथ अभियुक्त द्वारा उत्तर प्रदेश में अभ्यार्थियों और दलालों के अलावा अन्य लोगों से साथ एक षड्यंत्र के तहत ओमएमआर में हेरा फेरी करके, ओएमआर शीट को स्कैन करा कर उसमें सही उत्तर भरकर आरोग्य अभ्यर्थियों को सफल करवाया और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार का हनन किया.
संबंधित केस के अनुसंधान के दौरान रामवीर सिंह के पास अवैध तरीके से अर्जित 17 लख रुपये बरामद होने की भी पुष्टि हुई है.
कार्बन कॉपी की जांच से सीआईडी को पता चला ओएमआर शीट में हेराफेरी का तारीख
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी OMR शीट परीक्षा के बाद गोले भरकर (या सही करके) सफल कराई जाती थी. कार्बन कॉपी से मिलान में इस बेटी की पुष्टि हुई है. अभ्यर्थियों की OMR की कार्बन कॉपी और TDPL सर्वर से मिली मूल OMR में उत्तरों की संख्या में भारी अंतर पाया गया.
रक्षक सिंह के कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर थे, जबकि मूल OMR में 147 उत्तर पाए गए. इसी तरह सुमन सौरभ के कार्बन कॉपी में 48 प्रश्न के उत्तर थे, जबकि मूल OMR में 99 उत्तर मिले.एक अभ्यर्थी ने 14वीं पीटी के दोनों पेपर में क्रमशः 85 और 87 प्रश्न हल कर सफलता पाई, लेकिन बैकलॉग परीक्षा में, जो मात्र 27 दिन बाद हुई, वह केवल 12 और 35 प्रश्न ही कर सका.
इसी तरह वंदना कुमारी और ओम प्रकाश राणा के मामले भी संदिग्ध पाए गए. CCTV फुटेज में अभ्यर्थी OMR भरते नहीं दिखे, फिर भी उनकी OMR में 91-92 या 96 उत्तर पाए गए.
मास्टर आंसर और प्रश्नपत्र में छेड़छाड़
जांच में यह भी सामने आया कि TDPL ने बिना अनुमति मास्टर सेट के 10 प्रश्नों/उत्तरों में परिवर्तन किया. परीक्षा के दौरान OMR/उपस्थिति पत्र के गायब होने की सूचना भी मिली. परीक्षा में उत्तीर्ण हुए दो आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि एसीएफ और एफआरओ मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं मॉडल अंसार की सहायता से बाहर लिखवाई गई थी.
बरामद मॉडल उत्तर की छाया प्रति एसीएफ मुख्य परीक्षा में सफल एक अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका से मेल खाती है.
सत्यपाल सिंह ने धर्मेन्द्र को दिये 15 लाख नकद, उसे RM club में किया निवेश
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार टीडीपीएल के एक अन्य निदेशक सत्यपाल सिंह ने जेपीएससी में काम दिलाने के लिए 15 लाख नगर दिए थे. इस पैसे में से 10 लाख रुपये RM CLUB me निवेश किए गए थे.
जांच के दौरान हासिल रिकॉर्ड से भी इस बात की पुष्टि हुई है. जांच में यह भी पुष्टि स्पष्ट हुआ है कि अभियुक्त रामवीर सिंह की कंपनी के द्वारा गलत रूप से जेपीएससी से टेंडर लेने के लिए भी रिश्वत दिया गया था.
जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता और रामबीर सिंह ने रांची से हैदराबाद की यात्रा की
सीआईडी के द्वारा इंडिगो और मेक माई ट्रिप के विवरण से पता चला कि 28 मई 2026 को श्वेता गुप्ता और रामबीर सिंह ने रांची से हैदराबाद की यात्रा की, और श्वेता गुप्ता के परिजनों के टिकट उस्मान की आईडी से बुक हुए थे.श्वेता गुप्ता की WhatsApp चैट में फ्लाइट टिकट और बोर्डिंग पास का आदान-प्रदान भी मिला.
जेपीएससी कर्मियों ने अपने बयान में खोले रामबीर के घोटाले के राज
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार जेपीएससी कर्मी सौरभ सिंह और जितेन्द्र कुमार ने बताया कि रामबीर सिंह सहित tdpl के निर्देशों पर कर्मचारियों द्वारा OMR में छेड़छाड़ की गई. परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों के बयान में भी कहा गया कि निविदा प्रक्रिया समाप्त होने के बावजूद TDPL को अनियमित रूप से कार्य दिया गया और पूरा कार्य एक ही एजेंसी को सौंपा गया.जांच में पाया गया कि जीपीएससी की पूर्व परीक्षा के लिए ITI Limited को दिए गए कार्यादेश के तहत बिना अनुमति TDPL को कार्य आवंटित किया गया, और ITI Limited के एस्क्रो खाते से 04.04.2025 को TDPL को ₹1.76 करोड़ का भुगतान हुआ.

