आनंद दत्त/ किसलय शानू
चंडी तिवारी मूलतः धनबाद जिले के रहनेवाले हैं. रांची में रहकर बीते सात सालों से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. घर से 4 हजार रुपए महीना मिलता है, ताकि रांची में जिंदा रह सकें और परीक्षा की तैयारी कर सकें. इसी चार हजार में उन्हें कमरे का किराया देना होता है, खाने का इंतजाम करना होता है. अगर बीमार पड़े, तो फिर इलाज के लिए उनके पास सिवाय दोस्तों से कर्ज लेने के और कोई उपाय नहीं है.
कहते हैं, परीक्षा, पेपर लीक, सीट बिक्री, परीक्षा रद्द और फिर कोर्ट. इन्हीं पांच चीजों में जीवन की पूरी उम्मीद घूम रही है. पहले अकेले में रोते थे, अब आंसू खत्म हो गए हैं. चंडी जैसा जीवन झारखंड के लाखों छात्रों जी रहे हैं. उम्मीद से, लेकिन घुट-घुट कर.
चंडी जैसे छात्रों के दर्द पर अट्हास करते हुए उनके सपनों को रौंदने की पूरी कहानी हम आपके लिए निकाल लाए हैं. जोहार लाइव का सूत्र वाक्य है…खबर की तह तक. और हम तह तक गए हैं. जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षा देनेवाले और परीक्षा की तैयारी करनेवाले लाखों छात्रों को न्याय दिलाने के लिए. जोहार लाइव आगामी कई दिनों तक जेपीएससी और जेएसएससी में हुए भ्रष्टाचार के नंगा नाच को आपके सामने रखने जा रहा है.
बीते 22 जुलाई को झारखंड पुलिस ने गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (बीएसओ) अभय तिवारी को गिरफ्तार किया. उनके ऊपर जेपीएससी में धांधली करने का आरोप है. गिरफ्तार होने के बाद अभय तिवारी ने अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के सामने जिन बातों का खुलासा किया है, जिन बातों को कबूला है, वो झारखंड के परीक्षा सिस्टम पर जोरदार तमाचा है. जोहार लाइव उसकी स्वीकारोक्ति को हू-ब-हू रख रहा है.
अभय तिवारी की ओर से सीआईडी के सामने किए गए कबूलनामा (संबंधित साक्ष्य जोहार लाइव के पास उपलब्ध है) के मुताबिक टीडीपीएल को काम दिलाने के एवज में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव से दो करोड़ रुपए में सौदा तय हुआ था. इसके साथ कंपनी को विभिन्न कार्यों के लिए जितना भुगतान किया जाएगा, उस भुगतान में भी 20 प्रतिशत कमिशन अध्यक्ष को देना तय किया गया. इस लेनदेन में मुख्य कड़ी बना मुख्य सचिव के आवास में कार्यरत कर्मी धर्मेंद्र.
बकौल अभय तिवारी, धर्मेंद्र से जब संपर्क हुआ तो उसने कहा कि वह टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी में ओटीआर, ओएमआर स्कैनिंग, ओएसएम, एडमिट कार्ड जेनरेटिंग, एटेंडेंस शीट प्रिंटिंग का काम दिला देगा. इसके लिए उसने 20-25 लाख रुपया बतौर कमीशन मांग किया. साथ ही उसने यह भी कहा कि टीडीपीएल को काम दिलाने के अलावा वह उसके कुछ अभ्यर्थियों को भी पास करा देगा.
इसकी जानकारी जब मैंने टीडीपीएल के निदेशकों में से एक रामवीर सिंह को दी, तो वह तत्काल इसके लिए तैयार हो गया. इसके बाद रामवीर सिंह ने धर्मेंद्र के मांगने पर अपनी कंपनी से संबंधित कागजात उसे सौंप दिए. तब धर्मेंद्र ने वादा किया कि वह जेपीएससी में टीडीपीएल का प्रजेंटेशन करा देगा.
इधर प्रजेंटेशन से पहले अभय तिवारी, आनंद उर्फ सानंद प्रकाश, टीडीपीएल के दोनों निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह की मुलाकात जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते के साथ होटल रैडिशन ब्लू के वाटरफ्रंट के सामने स्थित रेस्टूरेंट में हुई.

जहां इन सभी की बातचीत हुई. जहां ख्यांगते ने कहा कि देखते हैं टीडीपीएल की क्या क्षमता है.
मोरहाबादी मैदान में मुलाकात और 2 करोड़ की डील
इस मुलाकात के दो दिन बाद अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के सामने प्रजेंटेशन हुआ. प्रजेंटेशन खत्म होते ही एल ख्यांगते ने रामवीर सिंह को धर्मेंद्र से मिलने को कहा और कंपनी की फाइल परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को दे दिया. फिर धर्मेंद्र ने कहा कि अब आगे की बातचीत वही करेगा.
अब आगे की बातचीत के लिए अभय तिवारी, रामवीर सिंह और धर्मेंद्र की मुलाकात मोरहाबादी मैदान में हुई. वही मैदान, जहां से जेएलएकम के नेता देवेंद्र महतो ने जेपीएससी-14 में हुई कथित धांधली के खिलाफ धरने की शुरूआत की थी.
बहरहाल, मुलाकात के बाद धर्मेंद्र ने तय किया कि चेयरमैन साबह यानी एल ख्यांगते को 2 करोड़ रुपए और काम दिलवाने के एवज में खुद उसे 20-25 लाख रुपया बतौर कमीशन देना है. साथ ही कुछ छात्रों को पास कराने के लिए शर्तें रखीं. जिसके मुताबिक ऊपर तय की गई रकम के अलावा टीडीपीएल कंपनी की जो भी बिलिंग होगी, यानी जितने पैसे वो जेपीएससी से लेगा, उसका 20 प्रतिशत हिस्सा अलग से एल. ख्यांगते को देना होगा. कंपनी के दोनों निदेशकों को धर्मेद्र की इन शर्तों को मानने में कोई परेशानी नहीं हुई. होती भी कैसे, प्लान तो पहले से तय था. एक-एक सीट के बदले छात्रों से 30 से 40 लाख रुपए जो मिलने थे.
मोरहाबादी मैदान में हुई इस मुलाकात के बाद इन सभी की मीटिंग महज कुछ सौ मीटर दूर स्टेट गेस्ट हाउस के एक कमरे में हुई. इस बातचीत के दौरान एल ख्यांगते ने कंपनी के दोनों निदेशकों को स्पष्ट तौर पर कहा कि वो लगातार धर्मेंद्र के संपर्क में रहें.

इसी मुलाकात के बाद जून 2025 में टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी से सभी परीक्षाओँ को कंडक्ट कराने का एग्रीमेंट हासिल हो गया और तत्काल प्रभाव से वर्क ऑर्डर भी मिल गया.
सीआईडी ने अब तक क्या-क्या कार्रवाई की
बता दें, 27 फरवरी 2026 14वीं सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख बढ़ाकर 9 मार्च कर दी गई. इस भर्ती में कुल 103 पद निकाले गए थे. बीते 8 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी हुआ. 19 अप्रैल 2026 को 14वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक यानी PT परीक्षा राज्यभर में आयोजित हुई.
इसके बाद 2 जुलाई को परीक्षा का रिज़ल्ट घोषित हुआ. कुल 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई हुए. मुख्य परीक्षा की तारीख 18 से 20 जुलाई तय की गई. रिजल्ट आते ही सवालों का सिलसिला शुरू हो गया.
श्रेणीवार यानी कैटेगरी-वाइज़ कटऑफ जारी ही नहीं हुई. एक अभ्यर्थी की OMR शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें सिर्फ 48 सवाल भरे थे, फिर भी उसका सिलेक्शन हो गया. आरोप लगा कि रिज़ल्ट आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना ही जारी कर दिया गया. इस पूरे मामले पर डुमरी विधायक जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जांच की मांग कर डाली.
बीती 20 जुलाई को पहले जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी ने छापेमापी कर तीन कर्मियों को गिरफ्तार किया.
उसी दिन देर शाम राज्य के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके और जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया. इसे अगले दिन यानी 21 जुलाई को राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया. इसी तारीख को एफ़आईआर भी दर्ज की गई.
22 जुलाई 2026 आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया. 25 जुलाई से 29 सितंबर के बीच होने वाली सभी 9 परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं. इनमें जेपीएससी मुख्य परीक्षा के अलावा सिविल जज परीक्षा, सहायक लोक अभियोजक परीक्षा जैसी बेहद अहम भर्ती परीक्षाएं.
23 जुलाई 2026 को दबाव बढ़ता देख सरकार ने पूरे मामले की जांच CID को सौंप दी. CID ने कुल 8 जगहों पर छापेमारी की, जिनमें शामिल थे: JPSC मुख्यालय, परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL के दफ्तर, पूर्व चेयरमैन का सरकारी आवास. इस छापेमारी में डिप्टी एग्ज़ाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता समेत 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई.
28 जुलाई से 1 अगस्त तक CID ने पूर्व चेयरमैन खियांग्ते से लगभग 32 घंटे तक पूछताछ की है. अब तक कुल 19 लोग, जिसमें टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी, अकाउंटेंट रक्षक सिंह, तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान और एबाद समेत कई कर्मचारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. आयोग की ओर से उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, कर्मी सोनू कुमार और कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार भी जेल भेजे जा चुके हैं. गलत तरीके से परीक्षा पास करने वाले चार अभ्यर्थी और तीन दलाल भी गिरफ्तार हो चुके हैं.
7 अगस्त को आईसा ने बिरसा चौक से मार्च निकाला. इसी दिन देर शाम छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल चार सदस्यी मंत्रीमंडल समूह से मुलाकात की और मांगों पर सहमति बनाने की कोशिश की. अगल दिन यानी 8 अगस्त को देवेंद्रनाथ महतो गुट के छात्रों ने इसी चार सदस्यी मंत्रीमंडल समूह से मुलाकात की. अब 10 अगस्त को छात्रों का विधानसभा घेराव प्रस्तावित है.
अगली कड़ी में हम आपको बताएंगे जेपीएससी के अन्य सदस्यों, पदाधिकारियों की किस प्रकार से मिलीभगत थी. किस कोचिंग संस्थान के निदेशक छात्रों के साथ गद्दारी में मिले हुए थे. आखिर अभय तिवारी का पूरा नेटवर्क कैसे काम करता था.
क्रमशः….
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