रांची. झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार के संवाद को लेकर अब नए सवाल खड़े हो गए हैं. एक दिन पहले उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा था कि सरकार छात्र संगठनों के अलावा किसी राजनीतिक दल से बातचीत नहीं करेगी. उन्होंने भाजपा और कथित कोचिंग माफियाओं से बातचीत नहीं करने की बात भी कही थी. इसके ठीक अगले दिन रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा छात्रों के बीच पहुंचकर मंत्री सुदिव्य सोनू को मांग पत्र सौंपते नजर आए. इसे लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने सवाल उठाया है कि आखिर सरकार की बातचीत की नीति क्या है?
मंच ने पूछा- राजनीतिक लोगों से मिलने का क्या अर्थ?
JPSC-JSSC Reform Manch से जुड़े छात्रों ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटनाक्रम पर सवाल उठाया. मंच का कहना है कि जब सरकार कल तक किसी राजनीतिक दल या उससे जुड़े लोगों से मिलने को तैयार नहीं थी, तो अब राजनीतिक कार्यकर्ता छात्रों के बीच पहुंचकर सरकार को मांग पत्र क्यों सौंप रहे हैं?
मंच ने सवाल किया कि जब आंदोलन को ही राजनीतिक करार देने की कोशिश की जा रही थी, तो अब राजनीतिक लोगों के साथ संवाद का क्या अर्थ है. मंच ने अपने समर्थकों से यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल के लोगों को आंदोलन स्थल पर प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए.
कांग्रेस नेता ने क्या कहा?
8 अगस्त को रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा छात्रों के बीच पहुंचे और मंत्री सुदिव्य सोनू को आंदोलन से जुड़ा मांग पत्र सौंपा. कुमार राजा ने सरकार की पहल के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स और उसकी भागीदारी निभाने वाले लोगों को बुलाकर बातचीत की जा रही है.
उन्होंने दावा किया कि छात्रों से बातचीत कर उनकी भावनाओं और मांगों को समझने के बाद मांग पत्र तैयार किया गया है.
कुमार राजा ने तत्काल 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग रखी. इसके अलावा संदिग्ध परीक्षाओं की CID से 90 दिनों के भीतर जांच कराने, जांच से जुड़ी सभी सूचनाओं को सार्वजनिक करने और JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की.
उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों के मन में यह डर नहीं रहना चाहिए कि परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक के कारण उनकी वर्षों की मेहनत बर्बाद हो जाएगी.
मांगों में भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी करना और परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को बाहरी एजेंसियों के हाथों में देने की व्यवस्था खत्म करना भी शामिल है.
आंदोलन के भीतर भी बढ़ रही गुटबाजी
इधर छात्र आंदोलन के भीतर अलग-अलग संगठनों की सक्रियता बढ़ने से इसकी एकजुटता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. JMM से जुड़े छात्र गुट ने पांच सदस्यों की टीम के साथ सरकार से बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही है.

वहीं जयपाल सिंह स्टेडियम में एक अलग छात्र गुट सामने आया है, जिसे AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के नेतृत्व वाला गुट बताया जा रहा है. इस तरह रांची में JPSC-JSSC आंदोलन के कम से कम तीन अलग-अलग छात्र गुट सक्रिय दिखाई दे रहे हैं.
इसी बीच 8 अगस्त को ABVP के छात्र संगठन ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़प भी देखने को मिली. जिसके बाद ABVP राज्य सचिव प्रकाश टुटी और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया.
क्या आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश?
इन घटनाक्रमों के बीच आंदोलनकारी छात्रों के एक वर्ग ने सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं. छात्रों का आरोप है कि कहीं अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग स्तर पर बातचीत कर आंदोलन को कमजोर या भटकाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है?
छात्रों का कहना है कि एक दिन सरकार छात्रों के साथ संवाद करती है और अगले दिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं के जरिए मांग पत्र लिया जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार अपनी पसंद के छात्र संगठनों और राजनीतिक मध्यस्थों के साथ बातचीत कर आंदोलन का समाधान निकालना चाहती है?

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में JPSC-JSSC विवाद का समाधान चाहती है, तो उसे सभी आंदोलनकारी छात्र संगठनों को एक मंच पर बुलाकर सामूहिक बातचीत करनी चाहिए. छात्रों की सामूहिक सहमति से समाधान निकाला जाना चाहिए.
छात्रों के मुताबिक राजनीतिक मध्यस्थों के जरिए बातचीत करने से न सिर्फ आंदोलन की दिशा को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है, बल्कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच भरोसे पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
अब बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों के सभी गुटों को एक साथ बातचीत की मेज पर लाएगी या अलग-अलग संगठनों के साथ बातचीत के जरिए इस आंदोलन का समाधान तलाशेगी?
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