Ranchi : बुढ़मू के अंचल अधिकारी (सीओ) सच्चिदानंद कुमार वर्मा की गिरफ्तारी अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है। झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संघ का कहना है कि गिरफ्तारी कानून के तय नियमों का पालन किए बिना की गई और इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में डर और असंतोष का माहौल बन गया है।
रविवार को संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की आपात बैठक हुई। बैठक में एसीबी की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे अवैध, असंवैधानिक और दमनकारी बताया गया। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई।
गिरफ्तारी से पहले जरूरी प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप
संघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17ए के तहत किसी लोक सेवक के आधिकारिक कार्यों से जुड़े मामले में जांच या गिरफ्तारी से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जरूरी होती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
संघ का दावा है कि सीओ को न तो रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया और न ही उनके पास से कोई नकद बरामद हुआ। ऐसे में बिना पूर्व अनुमति गिरफ्तारी करना कानून की भावना के खिलाफ है।
रिश्वत मांगने का प्रत्यक्ष सबूत नहीं होने का दावा
संघ ने कहा कि पूरे मामले में रिश्वत मांगने या लेने का कोई प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। प्रेस विज्ञप्ति में सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि भ्रष्टाचार के मामलों में रिश्वत की मांग और उसकी स्वीकार्यता साबित होना जरूरी है।
संघ का आरोप है कि केवल सह-आरोपी के पुलिस हिरासत में दिए गए बयान के आधार पर एक राजपत्रित अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि ऐसे बयान को अदालत में स्वतंत्र साक्ष्य के रूप में मान्यता नहीं मिलती।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन करने का आरोप
झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने एसीबी पर सर्वोच्च न्यायालय के डीके बसु और अरनेश कुमार मामलों में जारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया है।
संघ के मुताबिक, सीओ को तड़के करीब तीन बजे उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया और परिजनों को समय पर इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। संघ का कहना है कि ऐसे मामलों में पहले नोटिस जारी कर प्रारंभिक जांच की जानी चाहिए थी, लेकिन सीधे गिरफ्तारी कर दी गई।
म्यूटेशन मामला पहले ही हो चुका था खारिज
संघ ने उस नामांतरण (म्यूटेशन) मामले का भी जिक्र किया, जिसे इस कार्रवाई का आधार बताया जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संबंधित आवेदन को अंचल अधिकारी ने राजस्व उपनिरीक्षक और अंचल निरीक्षक की स्थल जांच रिपोर्ट के आधार पर 12 मई 2026 को नियमों के तहत खारिज कर दिया था।
आदेश में आवेदक को सक्षम न्यायालय में अपील करने का अधिकार भी दिया गया था। संघ का कहना है कि यह आदेश झारभूमि पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसमें किसी तरह की कानूनी गड़बड़ी नहीं है।
भू-माफिया के षड्यंत्र का लगाया आरोप
संघ का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला भू-माफिया के षड्यंत्र का प्रतीत होता है और एक ईमानदार अधिकारी को कानूनी संरक्षण देने के बजाय कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि संघ ने साफ किया कि वह किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करता, लेकिन कानून की आड़ में मनमानी कार्रवाई भी स्वीकार नहीं की जाएगी।
तीन सदस्यीय कमेटी बनेगी, सरकार को आंदोलन की चेतावनी
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने अपर सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने की घोषणा की है।
संघ ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, नियमों का उल्लंघन करने वाले एसीबी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की मांग की है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि अंचल अधिकारी को न्याय नहीं मिला तो राज्यभर के प्रशासनिक अधिकारी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
Also Read : भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न उठाने वाली कांग्रेस पार्टी को सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं : आदित्य साहू

