झारखंड की राजनीति में अपनी बेबाक और बागी छवि के लिए मशहूर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाया है जिससे पूरी सरकार में खलबली मच गयी है. अपनी ही सरकार की ब्यूरोक्रेसी से नाराज चल रहे वित्त मंत्री ने अब अपनी सरकारी गाड़ी भी वापस कर दी है. इससे पहले वे अपनी सुरक्षा में लगे जवानों और तीन गाड़ियों को भी वापस लौटा चुके थे. उनकी नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि दिल्ली में मौजूद होने के बावजूद वे होटल ताज में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.
यह पूरा मामला बीते तीन जुलाई को तब सामने आया जब हेमंत सोरेन सरकार के इस कद्दावर मंत्री ने पुलिस सुरक्षा लेने से साफ मना कर दिया. उन्होंने न सिर्फ अपनी गहरी नाराजगी जताई बल्कि अपने कोटे के सभी 16 पुलिस जवानों और 3 सरकारी गाड़ियों को पुलिस मुख्यालय को सौंप दिया. इस सिलसिले में उन्होंने राज्य के डीजीपी को एक बेहद सख्त चिट्ठी भी लिखी. मंत्री का कहना था कि उनकी सुरक्षा में तैनात 16 जवानों के लिए सिर्फ तीन गाड़ियां दी गई थीं जिनमें साजो-सामान के साथ जवानों को ठूंस-ठूंस कर बैठना पड़ता था. सुरक्षा के लिहाज से इसे गलत मानते हुए उन्होंने पहले भी एक अतिरिक्त गाड़ी की मांग की थी लेकिन पुलिस मुख्यालय ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया. मामला तब और बिगड़ गया जब नई गाड़ी देने के बजाय वित्त विभाग के ही संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह ने एक पुराना आदेश दिखाकर उनके बेड़े की तीन गाड़ियों में से भी एक गाड़ी कम करने का नोटिस जारी कर दिया. यह नोटिस सीधे मंत्री को न देकर उनके पर्सनल सेक्रेटरी को थमाया गया जिसे मंत्री ने इंबैरेसिंग माना था. राधाकृष्ण किशोर झारखंड की सियासत में एक ऐसे नेता के तौर पर जाने जाते हैं जो सत्ता के सुख से ज्यादा अपनी शर्तों पर राजनीति करना पसंद करते हैं. वे चाहे जिस भी पार्टी में रहे हों उन्होंने जनता के मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरने में कभी संकोच नहीं किया.
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