Johar Live Desk : भारतीय फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में एक अहम नाम, प्रेम सागर का आज सुबह 10 बजे निधन हो गया। वे प्रख्यात फिल्मकार रामानंद सागर के बेटे थे और खुद भी फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान रखते थे। प्रेम सागर 70 के दशक से इंडस्ट्री से जुड़े रहे और कैमरे के पीछे रहकर उन्होंने कई ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स को साकार किया।
पुणे स्थित प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से सिनेमैटोग्राफी और फोटोग्राफी की शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रेम सागर ने अपने करियर की शुरुआत बतौर सिनेमैटोग्राफर की थी। उन्होंने न केवल कैमरे की तकनीकी बारीकियों को समझा, बल्कि दृश्य की आत्मा को भी पर्दे पर उतारने की कला में महारत हासिल की।
उनका जुड़ाव ‘सागर आर्ट्स’ प्रोडक्शन हाउस से रहा, जिसने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुए धारावाहिक रामायण का निर्माण किया। इस पौराणिक सीरियल की भव्यता, इसकी सिनेमैटोग्राफी और प्रस्तुतिकरण में प्रेम सागर का अहम योगदान रहा। इसके अलावा भी उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में बतौर सिनेमैटोग्राफर और निर्माता काम किया, जिससे ‘सागर आर्ट्स’ की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा कायम रही।
प्रेम सागर को पर्दे के पीछे काम करने वाला एक सशक्त व्यक्तित्व माना जाता था, जिसकी मेहनत का असर हर फ्रेम में झलकता था। वे एक शांत, सौम्य और परिश्रमी व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे, और उनके साथ काम करने वाले सभी उन्हें बेहद सम्मान और स्नेह से याद करते हैं।
उनके निधन की खबर से फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर है। इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकारों, निर्देशकों और तकनीशियनों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। सभी का यही कहना है कि प्रेम सागर का जाना केवल एक शख्सियत का अंत नहीं, बल्कि रामानंद सागर के स्वर्णिम युग के एक मजबूत स्तंभ का टूटना है।