Khunti : खूंटी के लांदुप पंचायत में आयोजित वनभोज कार्यक्रम का माहौल सिर्फ मेल-मिलाप तक सीमित नहीं रहा। यहां राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा पहुंचे तो ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी। आदिवासी समुदाय और स्थानीय लोगों ने उन्हें घेरकर क्षेत्र की जमीनी हकीकत बताई। नीलकंठ मुंडा ने भी लोगों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनीं और राज्य की मौजूदा स्थिति पर साफ शब्दों में चिंता जताई।
“हमारी सुनने वाला कोई नहीं”
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों का दर्द साफ दिखा। लोगों ने कहा कि आज उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। रोजगार की कमी सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। कई युवाओं को काम नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से उन्हें बाहर पलायन करना पड़ रहा है। गांवों में विकास योजनाएं या तो रुकी पड़ी हैं या सिर्फ कागजों में चल रही हैं। ग्रामीणों का कहना था कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा।
पलायन बढ़ा, गांव हो रहे खाली
ग्रामीणों ने बताया कि काम नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। इससे गांवों की रौनक कम होती जा रही है। नीलकंठ मुंडा ने कहा कि जब लोग अपनी जमीन और घर छोड़कर बाहर जाने को मजबूर हों, तो यह साफ संकेत है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी कमी है। उन्होंने इसे क्षेत्र के विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
पूर्व मंत्री ने साफ कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। लोगों के मन में असुरक्षा का भाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आदिवासियों और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा करे, लेकिन हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। आम लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
“घोषणाएं बहुत, काम कम”
नीलकंठ मुंडा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घोषणाएं तो बहुत की जा रही हैं, लेकिन जमीन पर काम दिखाई नहीं दे रहा। भोली-भाली जनता को सिर्फ आश्वासन देकर शांत रखने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों में निराशा बढ़ रही है और भरोसा कमजोर हो रहा है।
उलगुलान की धरती है खूंटी
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने खूंटी की ऐतिहासिक पहचान का जिक्र किया। कहा कि यह उलगुलान और आंदोलनों की धरती रही है। यहां से हमेशा अधिकारों की आवाज उठती रही है। उन्होंने कहा कि यहां के लोग जागरूक हैं और अपने हक के लिए खड़े होना जानते हैं। जरूरत है कि उनकी आवाज को सुना जाए और समस्याओं का समाधान किया जाए। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से उठाया जाएगा और सरकार तक उनकी बात पहुंचेगी।
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