Patna : दानापुर के पूर्व विधायक और राजद नेता रीटलाल यादव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना पुलिस की विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है कि रीतलाल अपने क्षेत्र में संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन करते हैं और इसी रास्ते से उन्होंने अवैध संपत्ति अर्जित की है। पुलिस ने यह रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेज दी है, जिसके बाद ED जल्द ही मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति के मामले में कार्रवाई शुरू कर सकती है।
पुलिस रिपोर्ट में गंभीर आरोप
पुलिस के अनुसार, रीतलाल और उनके सहयोगियों के खिलाफ पहले से कई मामलों में चार्जशीट दाखिल हैं। पुलिस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जांच के दौरान दानापुर क्षेत्र में कई सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण के साक्ष्य मिले हैं, जिनका संबंध रीतलाल या उनके करीबियों से बताया गया है।
सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
खगौल थाना में दर्ज एक केस के बाद एसआईटी और खगौल पुलिस ने रीतलाल और उनके परिजनों की संपत्तियों की जांच शुरू की। भूमि अभिलेखों की जांच में सामने आया कि दानापुर क्षेत्र में कई कीमती जमीनें और फ्लैट रीतलाल के रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों के लिए अवैध आय का उपयोग किया गया।
76 डिसमिल सरकारी जमीन पर 16 दुकानें बनाने का दावा
जांच में यह भी सामने आया कि मुस्तफापुर मौजा स्थित सरकारी जमीन पर 16 दुकानों का निर्माण कराया गया था और इनसे किराया वसूला जा रहा था। प्रशासन ने मई 2025 में इस जमीन को खाली कराया था।
रंगदारी केस से खुली पोल
पूर्व विधायक वर्तमान में उस मामले में जेल में बंद हैं, जिसमें बिल्डर से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा था। इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस ने संगठित गिरोह की गतिविधियों का खुलासा होने का दावा किया है।पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह जमीन मालिकों और बिल्डरों से रंगदारी वसूलता है और कई सदस्य पहले से आपराधिक मामलों में नामजद हैं।
3 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत
कोथवां मौजा में तीन एकड़ गैर-मजरुआ जमीन पर कब्जे की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल है। पुलिस के अनुसार, यहां बड़े पैमाने पर अवैध घेराबंदी की गई थी। इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। सभी की नजरें ED की आने वाली कार्रवाई और मामले की आगे की जांच पर टिकी हुई हैं।
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