संवादहीनता और संवेदनहीनता ही है यूपीए सरकार की उपलब्धि : संजय सेठ

  • बिजली, कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बेखबर है यह सरकार
  • 30 सितम्बर तक सभी खराब ट्रांसफार्मर नहीं बदले तो दूंगा धरना

रांची : लोकसभा क्षेत्र समस्याओं के मकड़जाल में बुरी तरह उलझा हुआ है। बिजली, कानून व्यवस्था सहित कई ऐसी समस्याएं हैं, जिससे यहां की जनता रोज दो-चार हो रही है। बिजली समस्या की बात करूं तो स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एक ट्रांसफार्मर बदलने में एक 1 महीने लग रहे हैं। कई स्थानों पर तो 2-2 महीने से ट्रांसफार्मर गांव को नहीं मिल पा रहे हैं। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते पूरी जिम्मेवारी से मैं यह बात कहता हूं कि जनता मेरे पास आती है, परंतु ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने के कारण मैं उनकी मदद नहीं कर पा रहा हूं। अधिकारी भी यह बात कह रहे हैं कि हमारे पास ट्रांसफार्मर नहीं है। पुराना ट्रांसफार्मर ही मरम्मत करके हम लोगों को दे रहे हैं। इसके अलावा लोड शेडिंग एक बड़ी समस्या हो गई है। झारखंड की राजधानी रांची में कई क्षेत्रों में लोड शैडिंग हो रही है। गांव की तो बात ही छोड़ दीजिए। मैंने सरकार को कहा है कि जितने भी नंगे तार हैं, उन्हें कवर किया जाए और अंडर ग्राउंड केबलिंग की जाए, परंतु ऐसा लगता है जैसे सरकार राज्य की जनता को सिर्फ उलझाने में व्यस्त है। इसपर सरकार का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है।

शहर में सड़कों की स्थिति भी काफी बदहाल हो चुकी है। मुझे लगता है जबसे यह सरकार आई है, सरकार ने सड़कों का मेंटेनेंस भी नहीं किया है। कई स्थानों पर सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। सभी मीडिया के माध्यम से और अखबारों में ऐसी खबरें आती हैं। सड़कों पर दुर्घटना हो रही है। बाइक दुर्घटनाग्रस्त, ऑटो और कार दुर्घटनाग्रस्त होते चल रहे हैं। मतलब राजधानी की स्थिति यह है कि लोग जान हथेली पर लेकर चल रहे हैं।

कानून व्यवस्था की बात करूं तो यह और बदतर है। जब से सरकार आई है तब से लगातार हत्याओं का दौर शुरू है। सरकार बनने के साथ ही कोल्हान में 7 लोगों की हत्या हुई थी, उसके बाद से जो सिलसिला शुरू हुआ, उससे राजधानी भी अछूती नहीं। प्रतिदिन अखबार देखता हूं, शायद कोई ऐसा दिन हो जिस दिन हत्या की खबरें देखने को नहीं मिले परंतु यह कैसे हो सकता है।

सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है और सबसे दुखद बात मुझे यह लगती है पत्र लिखने के बाद भी, ट्वीट करने के बाद भी सरकार के रहनुमा किसी भी बात का कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझते। ऐसी संवेदनहीन सरकार इस राज्य में कभी नहीं हुई।

आप कल्पना कर सकते हैं कि राजधानी का सांसद सरकार को पत्र लिख रहा है परंतु इस सरकार को उससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जवाब देना जरूरी नहीं समझते। राज्य के मुद्दों पर समीक्षा करने की फुर्सत नहीं है।
ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र का चांडिल डैम उस क्षेत्र के लोगों के लिए काल बन गया है। डैम में 183 मीटर पानी रखा जाता है और इसकी वजह से सैकड़ों गांव डूबे हुए हैं। कई बार मैंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया। पत्र लिखा, सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी। इस डैम का पानी खोला जाए, इस पर सरकार का ध्यान ही नहीं है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब उस क्षेत्र के लोग महामारी जैसी समस्या से जूझने के लिए अपने आप को तैयार कर रहे हैं। क्षेत्र के लोग दहशत में हैं, आखिर कब तक ऐसे राज्य चलेगा? दुर्भाग्य है कि उस क्षेत्र में झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक है। इस पार्टी में अपने विधायकों की भी पूछ नहीं है या तो इनके विधायक भी अपनी सरकार की तरह ही संवेदनहीन हैं।

कांके में बनकर तैयार अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल को लेकर भी सांसद ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि इससे दुखद और कुछ नहीं हो सकता कि हमारा अपना कैंसर अस्पताल बनकर तैयार है और हमारे नागरिक कैंसर के इलाज के लिए दूसरे राज्यों में धक्के खाने को विवश हैं। महज एक प्रमाण पत्र के अभाव में यह कार्य लटका हुआ है। यह सरकार थोड़ी में संवेदशील हो जाए तो अस्पताल 24 घंटे में तैयार हो जाएगा।

संवेदनहीनता और संवादहीनता दोनों ही स्थिति किसी भी राज्य प्रशासन के लिए खराब होती है और झारखंड में यह दोनों स्थिति है, यह इस राज्य का दुर्भाग्य है।

आप सभी पत्रकार मित्रों के माध्यम से मैं एक बार फिर इस सरकार से आग्रह करता हूं, अनुरोध करता हूं कि जाग जाइए। जनता के हित में जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कुछ काम करिए, वरना यह संवादहीनता और संवेदनहीनता, आप को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी। सांसद ने स्पष्ट कहा कि यदि 30 सितम्बर तक सभी खराब पड़े ट्रांसफार्मर को नहीं बदला गया तो वो अपने क्षेत्र की जनता के साथ धरना देंगे।

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