ज्ञानवापी मस्जिद केस: सुप्रीम कोर्ट में 51 मिनट तक सुनवाई चली

नई दिल्ली: ज्ञानवापी मस्जिद केस पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 51 मिनट तक सुनवाई चली। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच में दोपहर 3 बजकर 16 मिनट पर सुनवाई शुरू हुई, जो 4 बजकर 7 मिनट पर खत्म हो गई। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि इस केस को केस की तरह ना लें। वहीं हिंदू पक्ष ने दलीलें रखी कि लोअर कोर्ट में रिपोर्ट आ गई है, इसे देखने का निर्देश जारी करें।

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से एडवोकेट सी वैद्यनाथन, एडवोकेट रंजीत कुमार, मुस्लिम पक्ष की ओर से एडवोकेट हुजैफा अहमदी, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। 

जानते हैं कोर्ट रूम में बहस के दौरान क्या-क्या हुआ:

1. लोअर कोर्ट क्या करेगा, हम कैसे कहें?
हिंदू पक्ष के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि कोर्ट में जो सर्वे रिपोर्ट रोकने के लिए याचिका दाखिल की गई थी, उस पर अंतरिम आदेश आ गया है। मुझे लगता है कि ट्रायल कोर्ट को रिपोर्ट देखने की अनुमति दी जाए। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिला जज के पास 20-25 साल का अनुभव है, हम कैसे कह दें कि वो क्या करें? जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि आप जज से इस पर बहस क्यों कर रहे हैं?

2. निचली अदालत पहले से प्रभावित है
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम ऐसा कोई भी फैसला नहीं देंगे, जिससे वहां मामला प्रभावित हो। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील अहमदी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट तो पहले से प्रभावित है। चंद्रचूड़ ने इस पर कहा कि आप इसे जैसे भी देखें, हमने ग्राउंड पर बेहतर रिजल्ट के लिए अंतरिम आदेश दे दिए हैं।

3. बहुत हो गया, आज सुनवाई ना करें
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक जस्टिस का फेयरवेल है, हम वहां से लौटकर फिर सुनवाई करें? इस पर कोर्ट में सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता और यूपी सरकार के वकील रंजीत कुमार राजी नहीं हुए। दोनों ने कहा कि आज सुनवाई ना करें, इसे बाद के लिए टाल दें।

4. बस चले तो आप सबको विवादित कह देंगे
मुस्लिम पक्ष के वकील अहमदी ने कहा कि 15 अगस्त 1947 तक ज्ञानवापी का कोई विवाद नहीं था। ऐसे में इसका मामला सुनना ही गलत है, जिस पर हिंदू पक्ष के वकील रंजीत कुमार ने कहा कि विवादित था। इस पर अहमदी भड़क गए और कहा आपका बस चले तो आप सबको विवादित कह देंगे।

5. माहौल खराब करने की साजिश है
अहमदी ने कहा कि देश में एक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। इससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा। इसे सिर्फ एक केस ना मानें, देश में बड़ा प्रभाव डालेगा। वहीं मेहता ने कहा कि अगर शिवलिंग के पास पांव धोने की इजाजत दी गई, तो लॉ एंड ऑर्डर का मामला बिगड़ सकता है।

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