रांची में 30 लाख के मोबाइल चोरी करने वालों का पर्दाफाश, गुवाहाटी से गिरफ्तार

रांचीः डोरंडा इलाके में स्थित ई-वल्ड मोबाइल दुकान से अपराधियों ने 30 लाख रुपये की मोबाइल चोरी की घटना को अंजाम दिया. इस कांड में रांची पुलिस ने तीन चोरों को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार अपराधियों में मास्टरमाइंड अमृतेश भी शामिल है, जो रांची के ही रहने वाले हैं. इसके अलावा दो आरोपी बिहार के रहने वाले हैं.

गिरफ्तार आरोपियो ने चोरी के सभी मोबाइल को नेपाल में बेच दिया था. इसके बाद गुवाहाटी में शरण ले रखा था. रांची पुलिस ने टेक्निकल सेल की मदद लेकर कुछ अपराधियों के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर रखा गया और जांच-पड़ताल शुरू की.

टेक्निकल सेल की ली गई मदद

रांची पुलिस को टेक्निकल सेल के एक इनपुट मिला. इस इनपुट के आधार पर रांची पुलिस की एक टीम असम के लिए रवाना हुई. इस टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर चोरी कांड के मास्टरमाइंड सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. इन अपराधियों को रांची लाया जा रहा है. गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया है कि चोरी कांड में कई और लोग शामिल हैं. इन अपराधियों के नाम का भी खुलासा किया है. अब पुलिस की एक टीम इन अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी शुरू कर दी है.

नेपाल में खपाया चोरी का मोबाइल
गिरफ्तार आरोपियों से प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली है. पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि मोबाइल चोरी करने के बाद बिहार के चंपारण ले गए, जहां से रक्सौल के रास्ते नेपाल के वीरजंग में सभी मोबाइल को बेच दिया. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से शुरुआती पूछताछ में कई अहम सुराग मिले है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

14 अक्तूबर को हुई थी मोबाइल दुकान में चोरी
रांची के डोरंडा इलाके में 14 अक्टूबर को ई-व‌र्ल्ड नामक मोबाइल दुकान में चोरी की घटना को अंजाम दिया गया. इस चोरी कांड में अपराधियों ने 30 लाख रुपए के मोबाइल की चोरी कर फरार हो गया था. इस संबंध में दुकानदार मो. वसीम ने डोरंडा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. वसीम ने पुलिस को बताया था कि शटर का ताला तोड़कर चोर दुकान में घुसा और घटना को अंजाम दिया.

सीसीटीवी फुटेज में दिखा चेहरा

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया. सीसीटीवी फुटेज में एक चोर दुकान के अंदर और बाकी चोर बड़े-बड़े थैलों में मोबाइल को रखते दिखा. चोरों ने अपने शर्ट से चेहरे को ढक लिया था, ताकि पहचान छिपाई जा सके. लेकिन जिस चोर ने दुकान के बाहर खड़ा था, उसका चेहरा स्पष्ट दिख रहा था. इसके आधार पर ही गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी की गई है.

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